Jeevan Ya Bheema Con? Review: आइडिया मजेदार, लेकिन कॉमेडी हर बार नहीं कर पाती कमाल
इंश्योरेंस का पैसा हासिल करने के लिए अपनी ही मौत का नाटक करना—आइडिया सुनने में जितना मजेदार है, फिल्म में उतना ही पागलपन लेकर आता है। Jeevan Ya Bheema Con? की कहानी कर्ज में डूबे जीवन की है, जो अपनी मौत का नाटक रचकर बीमा की मोटी रकम हासिल करना चाहता है। इसके लिए वह अपने हमशक्ल भीमा की लाश को अपनी जगह इस्तेमाल कर देता है और पत्नी योजना के साथ मिलकर पूरा प्लान बनाता है।
लेकिन अंतिम संस्कार के बाद जैसे ही बीमा एजेंट और कुछ अनचाहे मेहमान घर पहुंचते हैं, पूरा खेल बिगड़ जाता है। गैंगस्टर, चोरी के हीरे, बीमा का पैसा और हमशक्ल का कन्फ्यूजन कहानी को एक अजीबोगरीब कॉमेडी-क्राइम में बदल देते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही बना रहता है कि आखिर सामने खड़ा शख्स जीवन है या भीमा?
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत अरशद वारसी हैं। डबल रोल में वह दोनों किरदारों को अलग अंदाज देने में कामयाब रहते हैं और अपनी कॉमिक टाइमिंग से कई कमजोर पलों को भी संभाल लेते हैं। संजीदा शेख उनका अच्छा साथ देती हैं, जबकि विजय राज और बृजेंद्र काला भी अपने अंदाज में हंसाने की कोशिश करते हैं।
हालांकि फिल्म का बेसिक आइडिया काफी दिलचस्प है, लेकिन समस्या इसकी दोहराव भरी कहानी और असमान कॉमेडी है। कुछ सीन्स खूब हंसाते हैं, मगर कई जगह मजाक जबरदस्ती का महसूस होता है। ज्यादातर कहानी एक ही घर के आसपास घूमने की वजह से फिल्म आगे बढ़ते-बढ़ते थोड़ी खिंची हुई भी लगती है।
कुल मिलाकर, Jeevan Ya Bheema Con? में एक मजेदार कॉन्सेप्ट और अरशद वारसी की शानदार मौजूदगी है, लेकिन कहानी में अगर थोड़ा ज्यादा ट्विस्ट, रफ्तार और लगातार हंसी होती तो फिल्म का मजा काफी बढ़ सकता था। वन-टाइम कॉमेडी के तौर पर फिल्म देखी जा सकती है, लेकिन इससे बहुत ज्यादा उम्मीद रखना ठीक नहीं होगा।