Udta Teer Movie Review: आयुष्मान खुराना की कॉमेडी और राहुल बोस की अदाकारी में कितना दम? जानें कैसी है फिल्म
Rating: 3/5
जासूसी मिशन, देशभक्ति, गलत पहचान और कॉमेडी—जब किसी फिल्म में ये सारे मसाले एक साथ मिलते हैं, तो उम्मीद होती है कि पर्दे पर खूब मनोरंजन देखने को मिलेगा. आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म ‘उड़ता तीर’ भी कुछ ऐसी ही कहानी लेकर आई है, जिसमें एक शख्स अपनी असली पहचान भूलकर ऐसी मुश्किल में फंस जाता है कि हालात लगातार मजेदार होते चले जाते हैं. फिल्म में कॉमेडी के साथ एक्शन और सस्पेंस का भी तड़का है. हालांकि, कहानी को रफ्तार पकड़ने में थोड़ा वक्त लगता है. ऐसे में सवाल है कि क्या यह फिल्म दर्शकों को हंसाने में कामयाब होती है?
क्या है ‘उड़ता तीर’ की कहानी?
फिल्म की कहानी विक्रांत (आयुष्मान खुराना) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे लगता है कि वह भारतीय खुफिया एजेंसी CTS का अधिकारी है. लेकिन असलियत कुछ और ही है. वह दरअसल पाकिस्तानी एजेंट बिलाल है, जिसकी याददाश्त एक हादसे के बाद चली जाती है. अपनी पहचान को लेकर गलतफहमी का शिकार विक्रांत अनजाने में उन्हीं लोगों के खिलाफ खड़ा हो जाता है, जिनके साथ उसका असली कनेक्शन है.
यहीं से कहानी में कन्फ्यूजन, अजीब हालात और कॉमेडी का सिलसिला शुरू होता है. फिल्म का दिलचस्प पहलू यह है कि दर्शक उस सच्चाई से वाकिफ हैं, जिसे मुख्य किरदार समझ नहीं पा रहा. इस वजह से कई परिस्थितियां हास्य पैदा करती हैं. हालांकि, कहानी में कुछ ट्विस्ट ऐसे हैं, जिनका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है.
आयुष्मान खुराना ने कितना हंसाया?
आयुष्मान खुराना ऐसे किरदारों के लिए जाने जाते हैं, जिनमें कुछ अलग करने की गुंजाइश हो. ‘उड़ता तीर’ में भी वह दो अलग पहचानों के बीच उलझे शख्स का रोल निभाते हैं. किरदार की मासूमियत, उसकी गलतफहमियां और परिस्थितियों को समझने में उसकी नाकामी कॉमेडी पैदा करती हैं. आयुष्मान अपने अंदाज से इन दृश्यों को दिलचस्प बनाने की कोशिश करते हैं.
हालांकि, फिल्म की कॉमेडी हर जगह एक जैसा असर नहीं छोड़ती. कुछ पंच अच्छे लगते हैं, जबकि कुछ मौकों पर मजाक को और बेहतर तरीके से पेश किया जा सकता था. इसके बावजूद आयुष्मान की मौजूदगी फिल्म को संभालती है.
राहुल बोस ने लूटी महफिल
फिल्म के सबसे दिलचस्प पहलुओं में से एक राहुल बोस की परफॉर्मेंस है. उन्हें इस तरह के मजेदार अंदाज में देखना अलग अनुभव है. उनकी कॉमिक टाइमिंग और किरदार को निभाने का तरीका कई दृश्यों में फिल्म का मनोरंजन बढ़ाता है. वह अपने हिस्से के सीन्स में अच्छी छाप छोड़ते हैं और कई बार बाकी कलाकारों पर भारी पड़ते नजर आते हैं.
दिवंगत अभिनेता मुकुल देव की मौजूदगी भी फिल्म को खास बनाती है. उनका अभिनय कहानी में अपना योगदान देता है और पर्दे पर उन्हें देखना उनके प्रशंसकों के लिए भावुक अनुभव हो सकता है.
सुहैल नैय्यर अपने किरदार में प्रभावी लगते हैं. सारा अली खान और स्मिता तांबे भी अपनी भूमिकाओं में ठीक नजर आती हैं. वहीं राम कपूर, बृजेंद्र काला और गुलशन ग्रोवर जैसे कलाकार कहानी को सपोर्ट करते हैं. हालांकि, कुछ किरदारों को और बेहतर तरीके से विकसित किया जाता, तो उनका प्रभाव ज्यादा गहरा हो सकता था.
डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले में कितना दम?
लेखक-निर्देशक आकाश ए. कौशिक ने जासूसी की दुनिया को कॉमेडी के साथ जोड़ने की कोशिश की है. गलत पहचान पर आधारित कहानी में मनोरंजन की अच्छी संभावनाएं हैं और फिल्म कई जगह उनका फायदा भी उठाती है.
लेकिन फिल्म की शुरुआत में किरदारों और कहानी को स्थापित करने में काफी समय लगता है. इस वजह से शुरुआती हिस्सा थोड़ा धीमा महसूस हो सकता है. आगे बढ़ने पर कहानी में ट्विस्ट और मजेदार परिस्थितियां आती हैं, जो माहौल को बेहतर बनाती हैं. इंटरवल के बाद भी रफ्तार कुछ समय के लिए कमजोर पड़ती है, लेकिन फिल्म दोबारा गति पकड़ लेती है.
फिल्म का एक कमजोर पक्ष यह भी है कि इसका सस्पेंस बहुत ज्यादा चौंकाता नहीं. कई घटनाओं का अंदाजा पहले ही लगने लगता है. अगर स्क्रीनप्ले ज्यादा कसा हुआ होता और कॉमेडी के साथ सस्पेंस को भी मजबूत बनाया जाता, तो फिल्म का असर और बेहतर हो सकता था.
म्यूजिक, बैकग्राउंड स्कोर और तकनीकी पक्ष
फिल्म के गाने कहानी से निकलने के बाद भी लंबे समय तक याद रहने वाला प्रभाव नहीं छोड़ते. संगीत का पक्ष औसत है, लेकिन बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों में बेहतर काम करता है. यह सस्पेंस वाले पलों को प्रभावी बनाने और कॉमेडी के माहौल को आगे बढ़ाने में मदद करता है.
सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग कुल मिलाकर ठीक हैं. हालांकि, कुछ हिस्सों में एडिटिंग और बेहतर होती, तो फिल्म की गति बनाए रखने में मदद मिलती.
देखें या नहीं?
कुल मिलाकर, ‘उड़ता तीर’ एक ऐसी फिल्म है जो जासूसी और गलत पहचान की कहानी को कॉमेडी के जरिए पेश करती है. आयुष्मान खुराना का अलग अंदाज, राहुल बोस की कॉमिक टाइमिंग और सपोर्टिंग कास्ट फिल्म के सकारात्मक पहलू हैं. दूसरी ओर, धीमी शुरुआत, कुछ अनुमानित ट्विस्ट और हर जगह प्रभावी न बन पाने वाली कॉमेडी इसकी कमजोरियां हैं.
अगर आपको हल्की-फुल्की कॉमेडी, जासूसी की कहानियां और गलतफहमियों से पैदा होने वाला हास्य पसंद है, तो ‘उड़ता तीर’ को मौका दिया जा सकता है. लेकिन अगर आप मजबूत सस्पेंस और लगातार हंसाने वाली कॉमेडी की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो फिल्म आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी.
फैसला: कुछ मजेदार पलों और कलाकारों की अच्छी परफॉर्मेंस के दम पर ‘उड़ता तीर’ एक बार देखी जा सकती है, लेकिन इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले में और कसावट की गुंजाइश थी.