जिस रामायण की कहानी भारत की मिट्टी, संस्कृति, परंपरा और आस्था से जुड़ी है, उसी रामायण को बड़े पर्दे पर उतारने वाले मेकर्स का जोर फिलहाल विदेशी दर्शकों तक पहुंचने पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश स्टारर ‘रामायण’ को दुनियाभर में पहुंचाने की तैयारी में निर्माता नमित मल्होत्रा कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन इस पूरी कवायद के बीच एक सवाल लगातार खड़ा हो रहा है कि आखिर भारतीय दर्शकों और भारतीय मीडिया को इस फिल्म के प्रमोशन में कितनी अहमियत दी जा रही है?

27 अक्टूबर को लॉस एंजिल्स के प्रतिष्ठित डेविड गेफेन थिएटर में ‘रामायण’ का भव्य प्रीमियर आयोजित किया गया। इस मौके पर रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश, निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा मौजूद रहे। हॉलीवुड की कई चर्चित हस्तियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मौजूदगी में फिल्म को विदेशी दर्शकों के सामने पेश किया गया। मेकर्स की इस कोशिश को भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जिस फिल्म की आत्मा भारतीय महाकाव्य में बसती है, उसके प्रमोशन में भारतीय मीडिया को भी वैसी ही प्राथमिकता क्यों नहीं दिखाई दे रही?

नमित मल्होत्रा लगातार ‘रामायण’ को ग्लोबल सिनेमा के मंच पर स्थापित करने की बात कर रहे हैं। उनका मकसद विदेशी दर्शकों को भारतीय महाकाव्य से परिचित कराना है, जो अपनी जगह एक अच्छी पहल है। लेकिन क्या वैश्विक पहचान बनाने की कोशिश में भारतीय दर्शकों से सीधा संवाद पीछे छूटता जा रहा है? क्या फिल्म के मेकर्स को लगता है कि हॉलीवुड की तारीफ और विदेशी मीडिया की कवरेज ही इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए काफी होगी?

सबसे बड़ा सवाल फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर है। रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे बड़े सितारों से भारतीय दर्शक भी कई सवाल पूछना चाहते हैं। फिल्म के किरदारों की तैयारी से लेकर रामायण को समझने, उसकी संवेदनशीलता और इतने बड़े बजट के प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी तक कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर भारतीय मीडिया अपने सवाल रखना चाहेगी। लेकिन अगर प्रमोशनल इंटरव्यू में विदेशी मीडिया को ज्यादा जगह मिल रही है और भारतीय पत्रकारों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे, तो इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

नमित मल्होत्रा जी, आखिर भारतीय मीडिया से इतनी दूरी क्यों? क्या भारतीय पत्रकारों के सवालों का सामना करना मुश्किल है? क्या रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी भारतीय मीडिया के सामने बैठकर अपनी फिल्म, अपने किरदारों और इस महाकाव्य को लेकर अपनी तैयारी पर बात नहीं कर सकते? आखिर जिस भारतीय दर्शक के सामने इस फिल्म को सबसे पहले अपनी विश्वसनीयता साबित करनी है, उसे सीधे जुड़ने का मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए?

इसी बीच चर्चा यह भी है कि मेकर्स भारत में फिल्म की कोई विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करने को लेकर उत्साहित नहीं हैं। हालांकि, इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या भारत में भी मीडिया और फिल्म जगत के लिए विशेष स्क्रीनिंग की कोई योजना है या मेकर्स का पूरा जोर विदेशी बाजार पर ही रहने वाला है?