‘मैं स्किन शो में सहज नहीं हूं’, फिल्मों में बोल्ड सीन्स पर रश्मिका मंदाना का बड़ा खुलासा
रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दोनों करण जौहर के लोकप्रिय चैट शो ‘कॉफी विद करण 9’ के दूसरे एपिसोड में नजर आए। शो के दौरान नवविवाहित कपल ने अपनी लव स्टोरी, प्रपोजल, शादी और करियर से जुड़े कई दिलचस्प खुलासे किए। इसी बातचीत में रश्मिका ने फिल्मों में बोल्ड कपड़ों और किरदारों को लेकर अपनी सोच भी साझा की।
दरअसल, बातचीत के दौरान करण जौहर ने रश्मिका से जाह्नवी कपूर की फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर हुए विवाद पर सवाल किया। फिल्म के कुछ दृश्यों में जाह्नवी के किरदार को कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा कामुक अंदाज में दिखाए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी। करण ने रश्मिका से पूछा कि क्या वह भी अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में अपने किरदारों के चित्रण को लेकर सावधानी बरतती हैं?
इस सवाल के जवाब में रश्मिका ने साफ किया कि वह अपने काम को लेकर कुछ सीमाएं तय करके चलती हैं। उनके मुताबिक, वह ऐसे दृश्यों के लिए सहज नहीं हैं, जिनमें जरूरत से ज्यादा त्वचा दिखाने पर जोर दिया जाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कमर्शियल फिल्मों में कभी-कभी ऐसे कॉस्ट्यूम पहनने पड़ते हैं, जिनमें कलाकार पूरी तरह सहज महसूस नहीं करते। इसके बावजूद वह अपनी पसंद और सहजता को ध्यान में रखकर फैसले लेने की कोशिश करती हैं।
रश्मिका ने बताया कि वह इस तरह के मुद्दों पर अपने निर्देशकों से बातचीत करती हैं। वह ऐसे फिल्ममेकर्स के साथ काम करना पसंद करती हैं, जो उनकी बात सुनें और उनकी सीमाओं का सम्मान करें। अभिनेत्री ने यह भी स्वीकार किया कि कई बार अपनी असहजता जाहिर करना आसान नहीं होता और इसके लिए निर्माताओं के साथ काफी बातचीत करनी पड़ती है।
विजय देवरकोंडा ने बताया क्यों जरूरी है सपोर्ट सिस्टम
इस बातचीत में विजय देवरकोंडा ने भी रश्मिका की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कलाकारों के लिए अपनी बात रखने और किसी चीज के लिए मना करने का साहस जुटाना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। खासकर तब, जब उन्हें यह महसूस कराया जाए कि फिल्म साइन करने के बाद हर परिस्थिति में निर्देशक या निर्माता की बात मानना उनकी जिम्मेदारी है।
विजय के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में कलाकार खुद पर सवाल उठाने लगते हैं कि कहीं वह गैर-पेशेवर तो नहीं हैं या अपना काम ठीक से नहीं कर रहे। इसलिए कलाकारों के आसपास ऐसा सपोर्ट सिस्टम होना जरूरी है, जो उन्हें अपनी सीमाएं तय करने और जरूरत पड़ने पर स्पष्ट रूप से ‘ना’ कहने का भरोसा दे।
रश्मिका ने भी माना कि कलाकारों के लिए ऐसा माहौल होना चाहिए, जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी चिंताएं सामने रख सकें। उन्होंने बताया कि वह खुद भी कई बार किसी सीन को लेकर अपनी असहमति जाहिर करने से पहले सोचती हैं कि क्या वह अपनी बात कह पाएंगी।
‘पेड्डी’ के कुछ दृश्यों पर हुआ था विवाद
राम चरण स्टारर फिल्म ‘पेड्डी’ के कुछ दृश्यों को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना देखने को मिली थी। कुछ दर्शकों ने आरोप लगाया कि फिल्म में राम चरण के किरदार के जरिए जाह्नवी कपूर के किरदार को आपत्तिजनक तरीके से पेश किया गया। फिल्म के कुछ संवादों और दृश्यों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
ऐसे में करण जौहर के शो पर रश्मिका और विजय की यह बातचीत फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की सहमति, उनकी सहजता और अपने किरदारों को लेकर फैसले लेने के अधिकार जैसे अहम मुद्दों को सामने लाती है।