'रामायण' रिव्यू: 4000 करोड़ की 'रामायण' में भव्यता तो है, लेकिन वो बात नहीं! कई अहम मौकों पर चूके नितेश तिवारी
नितेश तिवारी की 'रामायण' के ट्रेलर और गानों ने दर्शकों को जितना निराश किया था, फिल्म उससे कहीं बेहतर साबित होती है। फिल्म के VFX शानदार हैं और कई दृश्य बड़े पर्दे पर भव्य अनुभव देते हैं। हालांकि, इस भव्यता के पीछे कहानी में कई ऐसी कमियां हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल है।
रामानंद सागर की आइकॉनिक 'रामायण' से तुलना करें तो विजुअल्स को छोड़कर नितेश तिवारी की यह फिल्म कहीं आसपास भी नहीं ठहरती। फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसके डायलॉग्स हैं। इसमें एक भी ऐसा संवाद नहीं है, जो सिनेमाघर से बाहर निकलने के बाद भी दर्शकों को याद रह जाए।
फिल्म में एक्शन की भरमार है, लेकिन इसके चक्कर में कई जरूरी भावनात्मक दृश्यों से समझौता किया गया है। सीता स्वयंवर का प्रसंग बेहद जल्दबाजी में निपटा दिया गया है। इससे भी ज्यादा निराशाजनक बात यह है कि शिव धनुष टूटने के बाद भगवान राम और परशुराम के बीच होने वाला महत्वपूर्ण संवाद फिल्म से गायब है। रामानंद सागर ने इस प्रसंग को जिस भावनात्मक तरीके से पर्दे पर उतारा था, वह आज भी यादगार है। नितेश तिवारी के पास भी इस दृश्य के जरिए दर्शकों को भावुक करने और रणबीर कपूर के राम को लोगों से जोड़ने का शानदार मौका था, लेकिन उन्होंने इसे गंवा दिया।
फिल्म में शूर्पणखा को जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम दिया गया है, जबकि जटायु और रावण के बीच की लड़ाई भी काफी लंबी खिंच गई है। शूर्पणखा के पति और रावण के बीच का युद्ध, जिसे रामानंद सागर की रामायण में नहीं दिखाया गया था, नितेश तिवारी की फिल्म में शामिल किया गया है। हालांकि, यह प्रसंग कहानी में उतना जरूरी महसूस नहीं होता। इन दृश्यों को छोटा करके राम और सीता के रिश्ते को और गहराई से दिखाया जा सकता था।
अभिनय की बात करें तो रणबीर कपूर को भगवान राम के किरदार पर अभी काफी मेहनत करने की जरूरत है। खासकर उनकी डायलॉग डिलीवरी और आंखों के हाव-भाव पर काम करने की जरूरत है। वहीं, यश ने रावण के किरदार में अच्छा काम किया है और साई पल्लवी भी सीता के रूप में प्रभावित करती हैं। हालांकि, इन तीनों के अलावा फिल्म का कोई दूसरा किरदार ऐसा नहीं है, जो लंबे समय तक याद रह जाए। रवि दुबे को भी अपने अभिनय पर और मेहनत करने की जरूरत है।
लेकिन फिल्म अपने सबसे शानदार सरप्राइज में से एक को आखिर के लिए बचाकर रखती है। एंड क्रेडिट्स खत्म होने के बाद हनुमान की एंट्री होती है, जो वाकई अद्भुत है। ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही दर्शकों की शिकायत थी कि फिल्म में हनुमान कहां हैं? मेकर्स ने फिल्म के अंत में उनकी झलक दिखाकर दर्शकों का दिल जीतने का काम किया है। इस दृश्य में हनुमान का चेहरा तो नहीं दिखाया गया, लेकिन यह साफ हो जाता है कि फिल्म में हनुमान की भूमिका सनी देओल ही निभाने वाले हैं। यह दृश्य फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के मन में उत्सुकता छोड़ जाता है।
कुल मिलाकर, नितेश तिवारी ने शानदार विजुअल्स के सहारे एक ठीक-ठाक फिल्म बनाई है, लेकिन 'रामायण' जैसी कहानी से जिस भावनात्मक गहराई और दमदार संवादों की उम्मीद थी, फिल्म वहां चूक जाती है। राहत की बात यह है कि यह पहला पार्ट है। दूसरे पार्ट में नितेश तिवारी के पास इन कमियों को सुधारने का पूरा मौका है।
अगर आपने रामानंद सागर की 'रामायण' देखी है और उसके साथ आपकी भावनाएं जुड़ी हुई हैं, तो सिनेमाघर में बहुत ज्यादा उम्मीदें लेकर न जाएं।