क्या वाकई 'रामायण' इतनी परफेक्ट है कि इसमें कोई कमी निकालने की गुंजाइश ही नहीं है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि फिल्म के ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही इसे लेकर कई तरह की आलोचनाएं सामने आई हैं। कभी रणबीर कपूर और यश की आवाज को उनके किरदारों के हिसाब से फिट नहीं बताया गया, तो कभी साई पल्लवी की कास्टिंग और हिंदी डबिंग पर सवाल उठे। फिल्म के गानों को लेकर भी दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया रही। इतना ही नहीं, फिल्म के विजुअल्स, किरदारों की झलक और कहानी को पेश करने के तरीके पर भी कई लोगों ने अपनी राय रखी।

लेकिन इन तमाम सवालों और आलोचनाओं के बीच फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने 'रामायण' को पूरे 5 में से 5 स्टार दे दिए हैं। उनका रिव्यू पढ़कर ऐसा लगता है मानो भारतीय सिनेमा ने अब तक ऐसा भव्य और शानदार अनुभव देखा ही नहीं। उन्होंने फिल्म के स्केल, VFX, एक्शन, म्यूजिक, इमोशन्स और लगभग हर कलाकार के अभिनय की जमकर तारीफ की है। यहां तक कि उन्होंने इसे सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि ऐसा सिनेमाई अनुभव बताया है जो भारत को गर्व महसूस कराएगा।

अब सवाल यह है कि क्या वाकई फिल्म इतनी शानदार है कि इसमें आलोचना के लिए कोई जगह ही नहीं बचती? क्या इसकी भव्यता और बड़े बजट ने इसकी बाकी कमियों को पूरी तरह ढक दिया है? या फिर तरण आदर्श को फिल्म में वो सब कुछ नजर आया, जो ट्रेलर और गानों के जरिए दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाया?

पूरे 5 स्टार देना गलत नहीं है, लेकिन जब किसी फिल्म को परफेक्ट बताया जाए, तो दर्शकों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस परफेक्शन का आधार क्या है?